Monday, April 24, 2017

वो लोग खाते तो यहाँ का है और बाजा वहाँ का बजाते है

मैं ब्राहमण होने से पहले हिन्दु हूँ और ये बात भी शाशवत् सत्य है की पैदा होते ही सब मनुष्य हिन्दु ही होते है बाकी बाद में उनहें क्या से क्या बनाया जाता है ज्यादा व्याख्या में नहीं जाऊंगा और न ही किसी की निंदा गाऊंगा और न ही किसी की स्तुति गाऊंगा 
 हिन्दु पैदा हुआ हूँ और यहाँ से ऊपर भी हिन्दु बन कर जाऊँगा बस गीत और महिमा ही हिन्दुस्तां की गाऊँगा और सारे विश्व को सुनाऊंगा 
पैदा जब मानुष देह से बच्चा होता है तो धिरे धिरे बडा होता है तो सब पर वह मधुर मधुर मुस्कान फेरता रहता है चाहे कोई दुश्मन हो या फिर मित्र सबके साथ बस मित्रवत् व्यवहार बडे होने पर कोई कैसे संस्कार देता है कोई कैसे
हिन्दु बोलता है बेटा चलते चलते नजर रास्ते पर रखना कयोंकि रास्ते में चिंटीयां किडे मकौडे और कई प्रकार के जीव रास्ते में होते है उन्हें दुख नहीं होना चाहिए अर्थात उन्हे गलती से मारकर भी पाप मत करना सब हमारे लिए ये असहाय जीव हमारे लिए शरणागत् है और इन्हें हम शरण दें रक्षण करें हमारा धर्म है
जब बडा होता है तो दया धर्म नैतिकता सदाचारी और मित्रवत् व्यवहार ही हिन्दु संतान में सबने अपने समाज और परिवार को सिखाया और पूरे विश्व इसको जानता है
लेकिन ऐसा क्यों हुआ की फिर भी हमारी सभ्य सभ्यता को सबने गुलाम बनवाया अत्याचार किऐ मित्र बनकर हमारा ही और हमारे लोगों का सामुहिक संहार किया इतिहास गवाह है गुरू तेगबहादुर जी ने अपने पूरे परिवार को हिन्दु धर्म बचाने के लिए और शरणागत को शरण देने के लिए तिल तिल होकर शहिद हो गए जुल्म और अत्याचार की कोई सिमा नहीँ थी और न रही किसी को कोल्हू में डाला गया तो किसी को गर्म तौऐ पर तिल तिल कर भूना गया किसी को कंटीली तारो से गोद कर दोनों तरफ से खिंचा गया तो किसी के बच्चों को काट कर कलेजा उसका मुँह में ठुसां गया फिर भी धर्म को जिंदा रखा और रखे हुऐ है ये अमर बलिदान कोई भी हो भुलाना मुश्किल है और दोहराना आसान है
कयोंकि जयचंदो का धर्म इमान नही होता उनका कर्म तो बेइमानी धोखा छल और अपने सगे संबंधियों तक भी न छोडने का इरादा होता है
आप सभी जानते है पृथवीराजचौहान जी ने जिसको 17 बार हराया और कारागार में बंदी बनाकर दया और रहम की भिख मांगकर जिसे छोड दिया उसने उनके साले को लालच देकर पृथ्वीराज चौहान जी को बंदी बनाया था कयोंकि घर का भेदी लंका डाऐ 
और उनकी आँखे निकालकर उनकी निर्मम हत्या कर दी गइ थी तो सतारह बार हरा कर और बंदी बनाकर फिर दया करके छोड देना इतने दयालु और कृपालु होने पर चौहान जी को क्या मिला सारा विश्व जानता है और जान लेना चाहिए 
जो भारत में विदेशी मित्र बन कर आया वो हिन्दु संतान में ही इसे धर्मशाला बनाकर यंही रहने लगा और हमारे लोग विदेशी लोगों को और इनकी विदेशी सोच को पालने और पोसने लगे और सिल सिला चलता रहा जो भी आया कोई ताया बनाया गया तो कोई जीजा तो कोई साला और कोई बाहर विदेश में जाकर वहाँ से शादी करके आ गया और फिर यहाँ की बहु बनकर तबाही का मंजर जो चला की सारे देश में हा हा कार मच गइ
सनकी लोग भी खुद भी तबाह होकर पता नहीं यहाँ कैसा कैसा इतिहास लिखकर तबाह हो गऐ और अभी होगें कयोंकि इस धरती को जिसने भी लुट खसोट अत्याचार और धोखा किया उनका और उनके वंश का सत्यानाश ही हुआ और अभी भी हो रहा है और होगा
कयोंकि हिंदु धर्म का अर्थ ये है की यहाँ पर कोई भी धर्म का हो जाती का हो संप्रदाय का हो वह सबसे पहले हिन्दु है और हिन्दु संतान का है बाकी बातें बाद में आज हिन्दोस्तान में जो ये दो विधान दो प्रधान दो निशान की जो विरासत में हमें मिला है ये अंग्रेजो और मुगलों के जयचंदो के वंशजों की नितीयां है जो जाते जाते यहाँ बिज रोपे गऐ थे ताकी यह देश खंड खंड होकर टुकडों में बंटता रहे और हम अपने देश से तमाशा देख कर मलाई खाते रहे और सर्वदा ही गुलामी और अत्याचार हम सहते रहें 
अंग्रेजो और मुगलों के जाने के बाद भी दिल्ली में और कशमिर में आज भी मलाई खा रहे है कयोंकि बाहर से इनको सहायता मिल रही है
आज के युग में धर्म के नाम पर कइ लोगों को कुर्सी तो मिल जाती है लेकिन कुर्सी पर बैठ कर इन्हे धर्म और दया भाव पर चलनें वालों को बोलने साथ चलने पर बंदिशों का सिलसिला जारी है
आज बडे बडे पैसो और शौहरत और कुर्सी के लिए धर्म दया और नैतिकता को पांव तले रौंद रहे है पता नहीं ये भी शायद जयचंद के साथ इतिहास में अपना नाम लिखवाने की होड में शामिल है
लेकिन जो माँ के नहीँ हुऐ वो मौसी के कैसे होगें 
 ये बात दोनों तरफ की है
सदा सर्तक सदा सावधान गद्दारों और जयचंदो को दुर से पहचान जाना चाहिए 
कयोंकि जब बखत है तोबखत रहते ज्ञान रखो इमान रखो
बाद में तो जान भी रखोगे तो कोई विश्वास नहीं करेगा
653 वर्ष मुगलों ने गुलाम बना कर वो किया जिस पर सारा विश्व हंसता है
फिर अंग्रेज आऐ उन्होंने भी अपना यहाँ 247 साल राज करके अपना पूरा दिल खोलकर अत्याचार और लुट खसोट की और गठरी बांधकर यहाँ से 1947 में चले गए आज ही उनका ही लिखा किताबी कानुन चल रहा है
वही जात पात भेद भाव आरक्षण और धारा 370इतयादी जो चिजें कैसर की तरह देश को अंदर ही अदर छलनी कर रही है सांप और विचछु की तरह डस रही है हर वर्ष योग्य युवक युवतियां इस आरुक्षण की बजह से आतमहतयाऐं करते है हम अपने देश के होनहारों को छोटी सी बात के लिए खो रहे है 
 मैं दिल से आरक्षण का विरोधी नहीं हूँ पक्षधर हूँ 
कयोंकि आरक्षण जरूर होना चाहिए लेकिन आधार उसका आर्थिक हो न की जाती के आधार पर
एक घर से सात आरक्षण लेकर अधिकारी है और बीस घरों में पी एच डी अच्छे नम्बरों में करके भी हर समय मानसिक तनाव में है तो क्या होगा जिसके पिछे परिवार सुदृढ है वो अमेरिका का बिजा लेकर अपनी सेवा और परिवार वहाँ जाकर रहेगा और अपना देश का होकर भी विदेश की निंव मजबुरी में मजबुत करेगा
और हम एक अच्छे वकील अच्छे डाक्टर और अच्छे होनहार बच्चों को आरक्षण के इस जहर की बजह से खो रहे है
और जिसका परिवार आर्थिक रूप से गरिब है वो विदेश तो जाऐगा नहीँ हर समय तनावपूर्ण माहौल में या तो ऐसे लोग इहलिला समाप्त करते है या फिर देश की एकता अखण्डता को कोस कोस कर लुटेरे या असंसकारी अहंकारी बनकर कुछ देशद्रोही और अलगाववादी बनते जा रहे है
इस व्यवस्था में मिल कर सौधार लाना होगा सख्त कानुन बनाना पडेगा जिसकी आज जरूरत है
कयोंकि पडौसी देश इस बात को हवा देकर कइ बार झमैला खडा कर देता है और मिडिया भी
पाकिस्तानी परस्त लोगों को हिरो बनाने में लिहाज नहीँ रखती अगर पाकिस्तान में ऐसा हो तो दिन दिहाडे डेर लग जाते है कुछ ज्यादा ही आजादी के पक्षधर भी नहीँ होना चाहिए कयोंकि कुछ बाहर से यहाँ आऐ कुत्ते भी बहुत भौकनें लगते है और यहाँ के नेता यहाँ आने पर इनको पालते पोसते रहते है 
 जैसे अवार्ड वापसी गैंग और देश के विरूद्ध नारे लगवाने वाले देशद्रोही गैंग और असहिष्णुता वाली गैंग इसके कुछ उदाहरण है
सिधी सी बात है यहाँ के जो नेता पहले सताधारी थे वो सतावहिन हो जाने पर ऐसे लोगों को उकसा कर मंच साझा करके इनको हवा दे रहे थे
लेकिन आश्रय देने वालों की मोदी जी ने एक भी नहीँ चलने दी उन्होने सिधा सिधा कहाँ जो देश की एकता और प्रभुसता पर कुठाराघात् करके उसे बखशा नहीँ जाऐगा
माननीय मोदी जी देश की एक विश्वास की किरण है
जिनको आज पूरा हिन्दुस्तान और विश्व एक जननायक मानता है और है भी उन्होने करके दिखा दिया है 
इससे पहले जो प्रधान मंत्री थे उन्के कार्यकाल में इतने घोटाले हुऐ की केन्द्र और राज्य का ऐसा कोई भी विभाग ऐसा नहीं था जिसमें करोडों अरबों के घोटाले जिसमें नहीं हुऐ हों
तभी ऐसे हुकमरानों को जनता ने जमीन दिखा दी थी जो हिन्दु संतान को फिर से गुलाम बनाने की शाजीश रच चूके थे उनको उनका स्थान दिखा दिया जनादेश कितना ताकतवर होता है लोकतंत्र में ये भारत की जनता ने पूरे विश्व को दिखा दिया
धन्य है भारत की जनता कोटी कोटी प्रणाम 
इसलिए नेताओं की कृपा के और संरक्षण के पात्र वो लोग होने चाहिए जो देश और जनता समाज के हितैषी हो न की उन्हें सरक्षण मिले जो खाते तो यहाँ का है और बाजा वहाँ का बजाते है सिनेमा में ही कुछ ऐसी ही हस्तियां है जो पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देकर हिन्दु संतान की जनता के साथ धोखा और फरेब कर रहे है जबकी यहाँ शरणार्थी है और कइयों के सहयोगी है

Friday, April 21, 2017

अजीबोगरीब परंपरा: जब मां की सौतन बन गयी बेटी

आपको शायद इस बात पर यकीन न हो लेकिन यह सच है। बांग्लादेश की मंडी जनजाति में यह अजीबोगरीब परंपरा है।
यहां रहने वाली 30 वर्ष की ओरोला के पिता की मृत्यु तब हो गयी थी जब वह बहुत ही छोटी थी। ओरोला इतनी छोटी थी कि उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली। ओरोला ने बताया कि दूसरी पिता का नाम नॉटेन था। नॉटेन को वह बहुत पसंद करती थी और यही सोचती थी उसकी मां कितनी किस्मत वाली है कि नॉटेन जैसा पति मिला। लेकिन जब ओरोला किशोरावस्था में प्रवेश कर गई तब उसे पता चला कि उसके दूसरे पिता नॉटेन ही उसके पति हैं। ये सुनते ही ओरोला के कदमों तले जमीन खिसक गई। पिता की तरह जिस आदमी को देखा, बाद में पता चला कि तीन साल की उम्र में ही उसकी शादी पिता से करवा दी गई है। बता दे कि ये एक परंपरा है जिसे तब अपनाया जाता है जब किसी महिला का पति कम उम्र में ही चल बसता है।
ऐसी स्थिति में महिला को अपनी पति के खानदान में से ही एक कम-उम्र के आदमी से शादी करनी होती है। ओरोला की मां के साथ भी यही हुआ था। ऐसे में कम-उम्र के नए पति की शादी उसकी होने वाली पत्नी की बेटी के साथ भी एक ही मंडप में करवा दी जाती है। माना जाता है कि कम-उम्र का पति नई पत्नी और उसकी बेटी का भी पति बनकर दोनों की सुरक्षा एक लंबे वक्त तक कर सकता है। ये बड़ा ही अजीब है। लेकिन ऐसी परंपरा के चलते ओरोला को अपने पति नॉटेन से तीन बच्चे हैं। वहीं उसकी मां को भी नॉटेन से ही दो बच्चे हैं।
दोनों मां-बेटी एक ही पति के संग एक घर में रहती है। लेकिन ऐसी परंपरा के चलते मां और बेटी की रिश्ते सामान्य नही है। ओरोला और उसकी मां में नॉटेन के चलते अजीब सी खटास है। दोनों पति के चलते एक-दूसरे को पसंद नहीं करती हैं।

Tuesday, April 18, 2017

हिंदी फिल्मों में हिंदुत्व का मजाक

'सलीम-जावेद' की जोड़ी की लिखी हुई फिल्मों को देखें, तो उनमें आपको अक्सर बहुत ही चालाकी से हिन्दू धर्म का मजाक तथा मुस्लिम / ईसाई धर्म को महान दिखाया जाता मिलेगा। इनकी लगभग हर फिल्म में एक महान मुस्लिम चरित्र अवश्य होता है और हिन्दू मंदिर का मजाक तथा संत के रूप में पाखंडी ठग देखने को मिलते हैं।

1/ फिल्म "शोले" में धर्मेन्द्र भगवान शिव की आड़ लेकर "हेमा मालिनी" को प्रेमजाल में फँसाना चाहता है, जो यह साबित करता है कि मंदिर में लोग लड़कियाँ छेड़ने जाते हैं। इसी फिल्म में ए. के. हंगल इतना पक्का नमाजी है कि बेटे की लाश को छोड़कर, यह कहकर नमाज पढने चल देता है कि उसे और बेटे क्यों नहीं दिए कुर्बान होने के लिए।

2/ "दीवार" का अमिताभ बच्चन नास्तिक है और वो भगवान का प्रसाद तक नहीं खाना चाहता है, लेकिन 786 लिखे हुए बिल्ले को हमेशा अपनी जेब में रखता है, और वो बिल्ला ही बार-बार अमिताभ बच्चन की जान बचाता है।
3/ "जंजीर" में भी अमिताभ नास्तिक है और जया, भगवान से नाराज होकर गाना गाती है, लेकिन शेरखान एक सच्चा इंसान है।

4/ फिल्म 'शान" में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर साधु के वेश में जनता को ठगते हैं, लेकिन इसी फिल्म में "अब्दुल" ऐसा सच्चा इंसान है जो सच्चाई के लिए जान दे देता है।

5/ फिल्म "क्रान्ति" में माता का भजन करने वाला राजा (प्रदीप कुमार) गद्दार है और करीमखान (शत्रुघ्न सिन्हा) एक महान देशभक्त, जो देश के लिए अपनी जान दे देता है।

6/ अमर-अकबर-एंथोनी में तीनों बच्चों का बाप किशनलाल एक खूनी स्मगलर है लेकिन उनके बच्चों (अकबर और एंथोनी) को पालने वाले मुस्लिम और ईसाई महान इंसान है।

7/ कुल मिलाकर आपको, 'सलीम-जावेद' की फिल्मों में, हिन्दू नास्तिक मिलेगा या फिर धर्म का उपहास करता हुआ कोई कारनामा दिखेगा जबकि शेरखान पठान, DSP डिसूजा, अब्दुल, पादरी, माइकल, डेबिड, आदि जैसे आदर्श चरित्र देखने को मिलेंगे।

8/ हो सकता है आपने पहले कभी इस पर ध्यान न दिया हो, लेकिन अबकी बार ज़रा ध्यान से देखना केवल 'सलीम/जावेद' की ही नहीं, बल्कि कादर खान, कैफ़ी आजमी, महेश भट्ट, आदि की फिल्मों का भी यही हाल है।

9/ फिल्म इंडस्ट्री पर दाऊद जैसों का नियंत्रण रहा है। इसमें अक्सर अपराधियों का महिमामंडन किया जाता है और 'पंडित' को धूर्त, ठाकुर को जालिम, 'बनिए' को सूदखोर, 'सरदार' को मूर्ख कॉमेडियन आदि ही दिखाया जाता है।

10/ 'फरहान अख्तर' की फिल्म "भाग मिल्खा भाग" में 'हवन करेंगे' का आखिर क्या मतलब था?

11/ pk में भगवान का रॉन्ग नंबर बताने वाले आमिर खान क्या कभी अल्लाह के रॉन्ग नंबर पर भी कोई फिल्म बनायेंगे?

मेरा मानना है कि- "यह सब महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश है...!!!"

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

हे परम वत्सला मातृभूमि! मै तुझे निरंतर प्रणाम करता हूँ

त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
(तूने सब सुख दे कर मुझको बड़ा किया|)

महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे,
(हे महा मंगला पुण्यभूमि!)

पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।
(तेरे ही कारण मेरी यह काया, तुझको अर्पित, तुझे मै अनन्त बार प्रणाम करता हु।।)

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता,
(हे सर्व शक्तिमय परमेश्वर! हम हिन्दुराष्ट्र के अंगभूत घटक,)

इमे सादरं त्वां नमामो वयम् |
(तुझे आदर पूर्वक प्रणाम करते है।)

त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं,
(तेरे ही कार्य के लिए हमने कमर कसी है,)

शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ||
(उसकी पूर्ति के लिए हमें शुभ आशीर्वाद दे||)

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं,
(सारा विश्व का सामना कर सके, अजेय ऐसी शक्ति दे ,)

सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत् |
(सारा जगत विनम्र हो ऐसा विशुद्ध (उत्तम) शील|)

श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं,
(तथा बुद्धि पूर्वक स्वीकृत, हमारे कंटकमय मार्ग को सुगम करे,)

स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।
(ऐसा ज्ञान भी हमें दे।।)

समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं
(अभ्युदय सहित निःश्रेयस की प्राप्ति का,)

परं साधनं नाम वीरव्रतम्
(वीर व्रत नामक जो सर्वश्रेष्ठ, साधन है,)

तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
(उसका हम लोगों के अंत:करण में स्फुरहण हो,)

हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
(हमारे हृदय मे, अक्षय तथा तीव्र ध्येयनिष्ठा सदैव जागृत रहे।)

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
(तेरे आशीर्वाद से हमारी विजय शालीन संघटित कार्य शक्ति,)

विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
(धर्म का रक्षण कर ।)

परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
(अपने इस राष्ट्र को परम वैभव की स्थिति,)

समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।।
(पर ले जाने में अतीव समर्थ हो ।।)

भारत माता की जय ।।

तलाक स्पेशल : जरूर पढ़ें

फुरसत से..... एक मित्र का संस्मरण

तब मैं नौकरी करता था। एक दिन खबर आई कि एक आदमी ने झगड़ा के बाद अपनी पत्नी की हत्या कर दी। मैंने खब़र में हेडिंग लगाई कि पति ने अपनी बीवी को मार डाला। खबर छप गई। किसी को आपत्ति नहीं थी। पर शाम को दफ्तर से घर के लिए निकलते हुए प्रधान संपादक प्रभाष जोशी जी सीढ़ी के पास मिल गए। मैंने उन्हें नमस्कार किया तो कहने लगे कि संजय जी, पति की बीवी नहीं होती।
“पति की बीवी नहीं होती?” मैं चौंका था।
“बीवी तो शौहर की होती है, मियां की होती है। पति की तो पत्नी होती है।”
भाषा के मामले में प्रभाष जी के सामने मेरा टिकना मुमकिन नहीं था। हालांकि मैं कहना चाह रहा था कि भाव तो साफ है न ? बीवी कहें या पत्नी या फिर वाइफ, सब एक ही तो हैं। लेकिन मेरे कहने से पहले ही उन्होंने मुझसे कहा कि भाव अपनी जगह है, शब्द अपनी जगह। कुछ शब्द कुछ जगहों के लिए बने ही नहीं होते, ऐसे में शब्दों का घालमेल गड़बड़ी पैदा करता है।
प्रभाष जी आमतौर पर उपसंपादकों से लंबी बातें नहीं किया करते थे। लेकिन उस दिन उन्होंने मुझे टोका था और तब से मेरे मन में ये बात बैठ गई थी कि शब्द बहुत सोच समझ कर गढ़े गए होते हैं।
खैर, आज मैं भाषा की कक्षा लगाने नहीं आया। आज मैं रिश्तों के एक अलग अध्याय को जीने के लिए आपके पास आया हूं। लेकिन इसके लिए आपको मेरे साथ निधि के पास चलना होगा।
निधि मेरी दोस्त है। कल उसने मुझे फोन करके अपने घर बुलाया था। फोन पर उसकी आवाज़ से मेरे मन में खटका हो चुका था कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। मैं शाम को उसके घर पहुंचा। उसने चाय बनाई और मुझसे बात करने लगी। पहले तो इधर-उधर की बातें हुईं, फिर उसने कहना शुरू कर दिया कि नितिन से उसकी नहीं बन रही और उसने उसे तलाक देने का फैसला कर लिया है।
मैंने पूछा कि नितिन कहां है, तो उसने कहा कि अभी कहीं गए हैं, बता कर नहीं गए। उसने कहा कि बात-बात पर झगड़ा होता है और अब ये झगड़ा बहुत बढ़ गया है। ऐसे में अब एक ही रास्ता बचा है कि अलग हो जाएं, तलाक ले लें।
मैं चुपचाप बैठा रहा।
निधि जब काफी देर बोल चुकी तो मैंने उससे कहा कि तुम नितिन को फोन करो और घर बुलाओ, कहो कि संजय सिन्हा आए हैं।
निधि ने कहा कि उनकी तो बातचीत नहीं होती, फिर वो फोन कैसे करे?
अज़ीब संकट था। निधि को मैं बहुत पहले से जानता हूं। मैं जानता हूं कि नितिन से शादी करने के लिए उसने घर में कितना संघर्ष किया था। बहुत मुश्किल से दोनों के घर वाले राज़ी हुए थे, फिर धूमधाम से शादी हुई थी। ढेर सारी रस्म पूरी की गईं थीं। ऐसा लगता था कि ये जोड़ी ऊपर से बन कर आई है। पर शादी के कुछ ही साल बाद दोनों के बीच झगड़े होने लगे। दोनों एक-दूसरे को खरी-खोटी सुनाने लगे। और आज उसी का नतीज़ा था कि संजय सिन्हा निधि के सामने बैठे थे, उनके बीच के टूटते रिश्तों को बचाने के लिए।
खैर, निधि ने फोन नहीं किया। मैंने ही फोन किया और पूछा कि तुम कहां हो ? मैं तुम्हारे घर पर हूं, आ जाओ। नितिन पहले तो आनाकानी करता रहा, पर वो जल्दी ही मान गया और घर चला आया।
अब दोनों के चेहरों पर तनातनी साफ नज़र आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि कभी दो जिस्म-एक जान कहे जाने वाले ये पति-पत्नी आंखों ही आंखों में एक दूसरे की जान ले लेंगे। दोनों के बीच कई दिनों से बातचीत नहीं हुई थी।
नितिन मेरे सामने बैठा था। मैंने उससे कहा कि सुना है कि तुम निधि से तलाक लेना चाहते हो?
उसने कहा, “हां, बिल्कुल सही सुना है। अब हम साथ नहीं रह सकते।”
मैंने कहा कि तुम चाहो तो अलग रह सकते हो। पर तलाक नहीं ले सकते।
“क्यों?”
“क्योंकि तुमने निकाह तो किया ही नहीं है।”
“अरे यार, हमने शादी तो की है।”
“हां, शादी की है। शादी में पति-पत्नी के बीच इस तरह अलग होने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर तुमने मैरिज़ की होती तो तुम डाइवोर्स ले सकते थे। अगर तुमने निकाह किया होता तो तुम तलाक ले सकते थे। लेकिन क्योंकि तुमने शादी की है, इसका मतलब ये हुआ कि हिंदू धर्म और हिंदी में कहीं भी पति-पत्नी के एक हो जाने के बाद अलग होने का कोई प्रावधान है ही नहीं।”
मैंने इतनी-सी बात पूरी गंभीरता से कही थी, पर दोनों हंस पड़े थे। दोनों को साथ-साथ हंसते देख कर मुझे बहुत खुशी हुई थी। मैंने समझ लिया था कि रिश्तों पर पड़ी बर्फ अब पिघलने लगी है। वो हंसे, लेकिन मैं गंभीर बना रहा।
मैंने फिर निधि से पूछा कि ये तुम्हारे कौन हैं?
निधि ने नज़रे झुका कर कहा कि पति हैं। मैंने यही सवाल नितिन से किया कि ये तुम्हारी कौन हैं? उसने भी नज़रें इधर-उधर घुमाते हुए कहा कि बीवी हैं।
मैंने तुरंत टोका। ये तुम्हारी बीवी नहीं हैं। ये तुम्हारी बीवी इसलिए नहीं हैं क्योंकि तुम इनके शौहर नहीं। तुम इनके शौहर नहीं, क्योंकि तुमने इनसे साथ निकाह नहीं किया। तुमने शादी की है। शादी के बाद ये तुम्हारी पत्नी हुईं। हमारे यहां जोड़ी ऊपर से बन कर आती है। तुम भले सोचो कि शादी तुमने की है, पर ये सत्य नहीं है। तुम शादी का एलबम निकाल कर लाओ, मैं सबकुछ अभी इसी वक्त साबित कर दूंगा।
बात अलग दिशा में चल पड़ी थी। मेरे एक-दो बार कहने के बाद निधि शादी का एलबम निकाल लाई। अब तक माहौल थोड़ा ठंडा हो चुका था, एलबम लाते हुए उसने कहा कि कॉफी बना कर लाती हूं।
मैंने कहा कि अभी बैठो, इन तस्वीरों को देखो। कई तस्वीरों को देखते हुए मेरी निगाह एक तस्वीर पर गई जहां निधि और नितिन शादी के जोड़े में बैठे थे और पांव पूजन की रस्म चल रही थी। मैंने वो तस्वीर एलबम से निकाली और उनसे कहा कि इस तस्वीर को गौर से देखो।
उन्होंने तस्वीर देखी और साथ-साथ पूछ बैठे कि इसमें खास क्या है?
मैंने कहा कि ये पैर पूजन का रस्म है। तुम दोनों इन सभी लोगों से छोटे हो, जो तुम्हारे पांव छू रहे हैं।
“हां तो?”
“ये एक रस्म है। ऐसी रस्म संसार के किसी धर्म में नहीं होती जहां छोटों के पांव बड़े छूते हों। लेकिन हमारे यहां शादी को ईश्वरीय विधान माना गया है, इसलिए ऐसा माना जाता है कि शादी के दिन पति-पत्नी दोनों विष्णु और लक्ष्मी के रूप हो जाते हैं। दोनों के भीतर ईश्वर का निवास हो जाता है। अब तुम दोनों खुद सोचो कि क्या हज़ारों-लाखों साल से विष्णु और लक्ष्मी कभी अलग हुए हैं? दोनों के बीच कभी झिकझिक हुई भी हो तो क्या कभी तुम सोच सकते हो कि दोनों अलग हो जाएंगे? नहीं होंगे। हमारे यहां इस रिश्ते में ये प्रावधान है ही नहीं। तलाक शब्द हमारा नहीं है। डाइवोर्स शब्द भी हमारा नहीं है।
यहीं दोनों से मैंने ये भी पूछा कि बताओ कि हिंदी में तलाक को क्या कहते हैं?
दोनों मेरी ओर देखने लगे। उनके पास कोई जवाब था ही नहीं। फिर मैंने ही कहा कि दरअसल हिंदी में तलाक का कोई विकल्प नहीं। हमारे यहां तो ऐसा माना जाता है कि एक बार एक हो गए तो कई जन्मों के लिए एक हो गए। तो प्लीज़ जो हो ही नहीं सकता, उसे करने की कोशिश भी मत करो। या फिर पहले एक दूसरे से निकाह कर लो, फिर तलाक ले लेना।”
अब तक रिश्तों पर जमी बर्फ काफी पिघल चुकी थी।
निधि चुपचाप मेरी बातें सुन रही थी। फिर उसने कहा कि
भैया, मैं कॉफी लेकर आती हूं।
वो कॉफी लाने गई, मैंने नितिन से बातें शुरू कर दीं। बहुत जल्दी पता चल गया कि बहुत ही छोटी-छोटी बातें हैं, बहुत ही छोटी-छोटी इच्छाएं हैं, जिनकी वज़ह से झगड़े हो रहे हैं।
खैर, कॉफी आई। मैंने एक चम्मच चीनी अपने कप में डाली। नितिन के कप में चीनी डाल ही रहा था कि निधि ने रोक लिया, “भैया इन्हें शुगर है। चीनी नहीं लेंगे।”
लो जी, घंटा भर पहले ये इनसे अलग होने की सोच रही थीं और अब इनके स्वास्थ्य की सोच रही हैं।
मैं हंस पड़ा। मुझे हंसते देख निधि थोड़ा झेंपी। कॉफी पी कर मैंने कहा कि अब तुम लोग अलगे हफ़्ते निकाह कर लो, फिर तलाक में मैं तुम दोनों की मदद करूंगा।
जब तक निकाह नहीं कर लेते तब तक “हम्मा-हम्मा-हम्मा, एक हो गए हम और तुम” वाला गाना गाओ, मैं चला।
मैं जानता हूं कि अब तक दोनों एक हो गए होंगे।
आपने देखा, हिंदी एक भाषा ही नहीं संस्कृति है।
संस्कार बचाओ संस्कृति ही दरोहर है।

Monday, April 17, 2017

अल्लाह का असली नाम माकिर है !!---

परम्परा के अनुसार हरेक व्यक्ति का केवल एक ही व्यक्तिगत नाम (personal name) होता है. जिस के माध्यम से उसे पुकारा या पहिचाना जाता है.लेकिन वह व्यक्ति अपने नाम का जितना प्रयोग करता है, उससे अधिक लोग उसके नाम का प्रयोग या दुरुपयोग करते हैं. और यह बात अल्लाह के बारे में सही उतरती है. लोगों ने अकेले अल्लाह के नाम पर अनेकों युद्ध किये हैं, जिसमे करोड़ों निर्दोष लोग मारे गए. यही नहीं रोज लाखों जानवर अल्लाह के नाम पर मारे और खाए जाते है. यद्यपि अल्लाह ने अपने मुंह से अपना नाम बहुत कम जगह बताया है. और जिन लोगों ने अल्लाह के 99 नाम गढ़ लिए हैं वह सिर्फ अल्लाह गुण हैं, या विशेषताएं है, जिन्हें " सिफात" कहा जाता है. और इन सिफातों के द्वारा अल्लाह की बढ़चढ़ कर तारीफ़ की जाती है, लेकिन अल्लाह के उस बुरे नाम को छुपा दिया जाता है, जो खुद अल्लाह न कुरआन में 5 बार बताया है हकीकत तो यह है कि जिस तरह अल्लाह को अजन्मा, और निराकार बताया जाता है उसी तरह अल्लाह " अनामी name less " भी है. जैसा कि इन हवालों से पता चलता है .
1- बेनाम के अनेकों नाम ---
बच्चों का नाम उसके माता पिता रखते हैं, इसलिए अल्लाह का कोई व्यक्तिगत नाम नहीं है, जैसा कि मौलाना रूम में अपनी मसनवी में बिस्मिल्लाह की जगह यह लिख दिया है.
"بنامِ آں کہ او نامے ندارد، بہر مامِ کہ خوانی سربرآرد "
"बनामे आं कि ऊ नामे नदारद , बहर नामे कि खुवानी सर बिरारद "
यानी उसके नाम से शुरू करता हूँ जिसका कोई नाम ही नहीं है, उसे किसी भी नाम से पुकारो काम चल जाता है. मौलाना रूम की इस बात का कुरान भी समर्थन करती है, कुरान में लिखा है -----
"और सभी भले गुणों वाले नाम अल्लाह के ही हैं, तो तुम उसे उन्हीं नामों के द्वारा पुकारो "सूरा -अल आराफ 7 :180."
"وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا "
"और तुम्हारे रब ने कहा कि तुम मुझे नाम से पुकारो ,मैं तुम्हारी पुकार का उत्तर दूँगा "सूरा -अल मोमिन 40 :60."
इन आयतों यह खास बात है कि अल्लाह के केवल अच्छे नामों की बात कही गयी है , और अल्लाह के बुरे नामों को छुपा दिया गया है.
2-अल्लाह की झूठी कसम ---
सब जानते हैं कि अल्लाह अपना राज्य चलाने के लिए फरिश्तों, नबियों और रसूलों कि मदद लेता है, लेकिन खुद को सर्वशक्तिमान और अकेला समर्थ साबित करने के लिए कभी एक वचन का प्रयोग भी करता है.जैसे --
" और वही है , जो तुम पर रहमत भेजता है , और उसी के फ़रिश्ते भी हैं "सूरा-अल अहजाब 33 :43."
"هُوَ الَّذِي يُصَلِّي عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتُهُ "
(इस आयत में अल्लाह ने " हुवهُو " शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ He होता है).
" और वही है , जो तुम्हें रात को ग्रस्त कर लेता है " सूरा -अल अनआम 6 :60"
"وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ بِاللَّيْلِ "
और फिर अल्लाह खुद को एक साबित करने के लिए अपनी गवाही के साथ फरिश्तों की गवाही भी देता है. जैसे ---
" खुद अल्लाह की, फरिश्तों की और ज्ञान वालों की गवाही है. कि उसके सिवा कोई उपास्य नहीं है "सूरा-आले इमरान 3 :18."
इस से सिद्ध होता है कि अल्लाह चाहता था कि काम तो फ़रिश्ते करें और लोग इबादत अल्लाह की करें .
3-अल्लाह शब्द में कई लोग शामिल ---
हालांकि अल्लाह ने और उसके डर फरिश्तों ने गवाही देदी कि अल्लाह की सत्ता में कोई दूसरा शामिल नहीं है. अल्लाह के इन बयानों से यह बात झूठ साबित होती है, क्योंकि जगह जगह अल्लाह अपने लिए हम We (अरबी में नहनु ) शब्द प्रयोग करता है, जैसे ---
"हमने तुमसे पहले भी मनुष्यों को रसूल बना कर भेजा है " सूरा -नहल 16 :43".
"और हमने लोगों की आँखों पर जादू कर दिया है "सूरा - अल हिज्र 15 :15."
" निश्चय ही हमने मनुष्य को मिट्टी के सत से बनाया है "सूरा- अल मोमिनून 23 :12."
" बेशक यह याद दिहानी ( reminder ) हमने उतारी है , और हम ही इसके रक्षक हैं "सूरा -अल हिज्र 15 :9."
"إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ "
( इस आयात में अल्लाह ने " नहनुنحنُ" शब्द प्रयोग किया है जो वहुवचन we होता है )
अर्थात अल्लाह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक समूह (group ) है और जिसके Admin रसूल है, यह बात इस आयत से और स्पष्ट होती है.
"हे हमारे अल्लाह , राज सिंहासन के मालिक , आप जिसे चाहें राज्य प्रदान करें या छीन लें "सूरा -आले इमरान 3 :26."
"قُلِ اللَّهُمَّ مَالِكَ الْمُلْكِ تُؤْتِي الْمُلْكَ "
(इस आयत में अल्लाहुम्म اللَّهُمَّ शब्द से अल्लाह को पुकारा गया है, जिसका अर्थ हमारे अल्लाहो होता है. यानी सभी अल्लाह, यदि एक अल्लाह होता तो उसे "یا الله या अल्लाह " कहा जाता ).
4-अन्य धर्मग्रंथों में ईश्वर के निजी नाम ---
यदि कुरान और हदीसों का अध्यन करें तो अल्लाह ने अपने मुंह हे अपना नाम कभी नहीं बताया है. और न मुहम्मद साहिब को बताया था. परन्तु अल्लाह की किताब " तौरेत " यानी बाइबिल में एक जगह खुद मूसा को अपना असली निजी नाम बता दिया था.
" और जब मूसा ने पूछा कि मैं लोगों को तेरा क्या नाम बताऊँ जिस से उनको यकीन हो जाये तो जवाब आया कह देना मैं हूँ जो हूँ (हिब्रू में " ये ही अशेर येही "और लेटिन में Ego sum qui sumAnd God said unto Moses: 'I AM THAT I AM' Exodus3:14.
", אֶהְיֶה אֲשֶׁר אֶהְיֶה "
इसी प्रकार जब पैगम्बर जरदुश्त ने ईश्वर (अहुर मज्द) से उसका नाम पूछा था तो उसने यह जवाब दिया था " वीसान्तेमो " अह्मि यत अह्मि " मझ्दाओ नाम " यानि मेरा बीसवां नाम यह है, जो महान है .
વીસાંસ્તૅમો અહ્મિ યત અહ્મિ મઝ્દાઑ નામ
ખોરદૅહ અવૅસ્તા-હૉરમઝ્દ યશ્ત-પાના.૧૫૪
यदि हम इन दोनो धर्म के अनुसार ईश्वर के नाम का अर्थ समझें तो यह वही नाम है जिसका उल्लेख उपनिषदों में किया गया है और वेदांती लोग प्रयोग करते हैं यह शब्द है -'सोऽहम ".
5- अल्लाह ने अपना यह नाम रखा ---
मुस्लिम विद्वान् भले ही अल्लाह के 99 अच्छे नाम रख लेकिन जब अल्लाह को नाम रखने का समय मिला तो उसने अपना बुरा नाम ही रख दिया और कुरान में पांच बार इसका उल्लेख है. --
"उन्होंने मक्कारी की, और अल्लाह सबसे बड़ा मक्कार है "सूरा -आले इमरान 3 :54."
" ومكروا ومكر الله والله خير الماكرين -3:54
"यह लोग अल्लाह की मक्कारी से बेफिक्र हो गए हैं , तो अल्लाह की मक्कारी से बेफिक्र होने वाले घाटे में पड़ने वाले हैं "
सूरा -अल आराफ 7 :99."
" افامنوا مكر الله فلايامن مكر الله الا القوم الخاسرون -7:99
" वे अपनी मक्कारी कर रहे थे, और अल्लाह अपनी मक्कारी कर रहा था. बेशक अल्लाह ही सबसे बड़ा मक्कार है "सूरा -अनफाल 8 :30".
"واذ يمكر بك الذين كفروا ليثبتوك او يقتلوك او يخرجوك ويمكرون ويمكر الله والله خير الماكرين- -8:30
" कहदो ,कि अल्लाह मक्कारी में सबसे तेज है " सूरा-यूनुस 10 :21."
" واذا اذقنا الناس رحمة من بعد ضراء مستهم اذا لهم مكر في اياتنا قل الله اسرع مكرا ان رسلنا يكتبون ماتمكرون -10;21
"कह दो कि सारी मक्कारी तो बस अल्लाह के हाथों में ही है " सूरा - रअद 13 :42"
"
وقد مكر الذين من قبلهم فلله المكر جميعا يعلم ماتكسب كل نفس وسيعلم الكفار لمن عقبى الدار --13:42
इन सभी आयतों में अल्लाह ने खुद को " मकर مکر" करने वाला यानि धोखेबाज (Deceiver) बताया है. और अरबी व्याकरण के अनुसार मकर करने वाले को " माकिर ماكر (Makir) कहा जाता है .
विचार करने के योग्य यह बात है कि जब अल्लाह ऐसा है उसे इसी नाम से क्यों न पुकारा जाये.

Saturday, April 15, 2017

आनन्द व सन्तुष्टि की परम अनुभूति

बेल बजी तो द्वार खोला। द्वार पर शिवराम खड़ा था। शिवराम हमारी कॉलोनी के लोगों की गाड़ियाँ, बाइक्स वगैरह धोने का काम करता था।

" साहब, जरा काम था। "

" तुम्हारी पगार बाकी है क्या, मेरी तरफ ? "

" नहीं साहब, वो तो कब की मिल गई। पेड़े देने आया था, बेटा दसवीं पास हो गया। "

" अरे वाह ! आओ अंदर आओ। "

मैंने उसे बैठने को कहा। उसने मना किया लेकिन फिर, मेरे आग्रह पर बैठा। मैं भी उसके सामने बैठा तो उसने पेड़े का पैकेट मेरे हाँथ पर रखा।

" कितने मार्क्स मिले बेटे को ? "

" बासठ प्रतिशत। "

" अरे वाह ! " उसे खुश करने को मैं बोला।
आजकल तो ये हाल है कि, 90 प्रतिशत ना सुनो तो आदमी फेल हुआ जैसा मालूम होता है। लेकिन शिवराम बेहद खुश था।

" साहब, मैं बहुत खुश हूँ। मेरे खानदान में इतना पढ़ जाने वाला मेरा बेटा ही है। "

" अच्छा, इसीलिए पेड़े वगैरह ! "

शिवराम को शायद मेरा ये बोलना अच्छा नहीं लगा। वो हलके से हँसा और बोला, " साहब, अगर मेरी सामर्थ्य होती तो हर साल पेड़े बाँटता। मेरा बेटा बहुत होशियार नहीं है, ये मुझे मालूम है। लेकिन वो कभी फेल नहीं हुआ और हर बार वो 2-3 प्रतिशत नंबर बढ़ाकर पास हुआ, क्या ये ख़ुशी की बात नहीं ? "
" साहब, मेरा बेटा है, इसलिए नहीं बोल रहा, लेकिन बिना सुख सुविधाओं के वो पढ़ा, अगर वो सिर्फ पास भी हो जाता, तब भी मैं पेड़े बाँटता। "

मुझे खामोश देख शिवराम बोला, " माफ करना साहब, अगर कुछ गलत बोल दिया हो तो। मेरे बाबा कहा करते थे कि, आनंद अकेले ही मत हजम करो बल्कि, सब में बाँटो। ये सिर्फ पेड़े नहीं हैं साहब - ये मेरा आनंद है ! "

मेरा मन भर आया। मैं उठकर भीतरी कमरे में गया और एक सुन्दर पैकेट में कुछ रुपए रखे।

भीतर से ही मैंने आवाज लगाई, " शिवराम, बेटे का नाम क्या है ? "

" विशाल। " बाहर से आवाज आई।

मैंने पैकेट पर लिखा - प्रिय विशाल, हार्दिक अभिनंदन ! अपने पिता की तरह सदा, आनंदित रहो !

" शिवराम ये लो। "

" ये किसलिए साहब ? आपने मुझसे दो मिनिट बात की, उसी में सब कुछ मिल गया। "

" ये विशाल के लिए है! इससे उसे उसकी पसंद की पुस्तक लेकर देना। "

शिवराम बिना कुछ बोले पैकेट को देखता रहा।

" चाय वगैरह कुछ लोगे ? "

" नहीं साहब, और शर्मिन्दा मत कीजीए। सिर्फ इस पैकेट पर क्या लिखा है, वो बता दीजिए, क्योंकि मुझे पढ़ना नहीं आता। "

" घर जाओ और पैकेट विशाल को दो, वो पढ़कर बताएगा तुम्हें। " मैंने हँसते हुए कहा।

मेरा आभार मानता शिवराम चला गया लेकिन उसका आनंदित चेहरा मेरी नजरों के सामने से हटता नहीं था।
आज बहुत दिनों बाद एक आनंदित और संतुष्ट व्यक्ति से मिला था।

आजकल ऐंसे लोग मिलते कहाँ हैं। किसी से जरा बोलने की कोशिश करो और विवाद शुरू। मुझे उन माता पिताओं के लटके हुए चेहरे याद आए जिनके बच्चों को 90-95 प्रतिशत अंक मिले थे। अपने बेटा/बेटी को कॉलेज में एडमीशन मिलने तक उनका आनंद गायब ही रहता था।

मोगरे के फूल की खुशबू सूंघने में कितना समय लगता है ?

सूर्योदय-सूर्यास्त देखने के कितने पैसे लगते हैं ?

स्नान करते हुए अगर आपने गीत गाया, गुनगुनाया, तो कौन आपसे कॉम्पिटीशन करने आने वाला है ?

बारिश हो रही है ? बढ़िया है - जाओ भीगो उस बारिश में !

कुछ भी करने के लिए आपको मूड़ लगता है क्या ?

इंसान के जन्म के समय उसकी मुट्ठियाँ बंद होती हैं।
ईश्वर ने एक हाँथ में आनंद और एक में संतोष भरके भेजा है।

दूसरों से तुलना करते हुए
और पैसे,
और कपड़े,
और बड़ा घर,
और हाई पोजीशन,
और परसेंटेज...!

इस *और* के पीछे भागते भागते उस आनंद के झरने से कितनी दूर चले आए हम !

हिमाचल प्रदेश, इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं ये झीलें

30 छोटी-बड़ी रियासतों को मिलाकर 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश अस्तित्व में आया था, लेकिन इसे पूर्ण राज्य का दर्जा 25 जनवरी 1971 को मिला। हिमाचल विविधताओं से भरा प्रदेश है जिसकी भौगोलिक स्थितियां भी विषम हैं। दूर-दूर तक फैली हिमाच्छादित हिमालय तुंग, गगनचुम्बी पर्वतमालाएं, घने जंगल तथा कल-कल बहती नदियां, सुंदर झरने, दुर्लभ जड़ी-बूटियां ऊंची-ऊंची पहाड़ियां और मीलों तक फैले पेड़ों की लम्बी श्रृंखला, आसमान छूती बर्फ की चादर ओढ़े पहाड़ की चोटियां, सुंदर सैरगाहें, रमणीक धार्मिक स्थल और खूबसूरत झीलें इसे अलग ही रूप प्रदान करते हैं। इसके कोने-कोने में नैसर्गिक सौंदर्य के बिखरे पड़े खजाने आलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य के एवं सांस्कृतिक विविधता के भी दर्शन होते हैं। यहां अनेक सुंदर सैरगाहें, बर्फ से ढंके सफेद पहाड़, खूबसूरत शुद्ध नीले जल से भरी झीलें और रमणीक धार्मिक स्थल हैं, जिन्हें प्रकृति ने अत्यंत खूबसूरती से संवारा है। पूरे साल के मौसम में यहां का नजारा मंत्रमुग्ध करने वाला होता है। सर्दियों में बर्फ ढंकी पहाड़ियां व सुंदर झीलें इन शांत पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक खूबसूरती को कई गुणा बढ़ा देती हैं। हिमाचल के लगभग प्रत्येक जिले में कोई न कोई झील है। जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं

                                 रिवालसर झील 
जिला मुख्यालय मंडी से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल से लगभग 4420 फुट की ऊंचाई पर मंडी-हमीरपुर-जालंधर सड़क मार्ग पर हिन्दू, बौद्ध और सिख धर्म की त्रिवेणी के रूप में विख्यात रिवालसर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ तीनों धर्मों के ऐतिहासिक तथ्यों को भी समेटे हुए होने के कारण समान रूप से दर्शनीय व पूजनीय है। तीन धर्मों का सांझा तीर्थ स्थल होने के कारण पर्यटक व श्रद्धालु वर्ष भर यहां आते रहते हैं। ऊंची-ऊंची रमणीक पहाड़ियों के मध्य स्थित खूबसूरत झील का स्वच्छ नीला जल मानो अपने स्वर्णिम युग की कहानी को दोहरा रहा है। झील के उत्तर-पूर्व में गुरु गोबिन्द सिंह की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के प्रयोजन से निर्मित गुरुद्वारा स्थित है। बौद्ध अनुयायी इस स्थान को गुरु पद्म संभव की तपोस्थली मानते हैं। महर्षि लोमष की तपोस्थली होने के कारण हिन्दुओं की भी यहां गहन श्रद्धा है। शिखर शैली में निर्मित मंदिर में उन्हें प्रस्तर प्रतिमा के रूप में स्थापित किया गया है। झील के किनारे भगवान शिव का शिखर शैली का खूबसूरत मंदिर स्थित है। इस पावन झील से लगभग 5-6 किलोमीटर की दूरी पर सरकीधार नामक स्थल है। यहां सात छोटी-बड़ी झीलें हैं जिन्हें ‘सात सरों’ के नाम से भी जाना जाता है। इनका संबंध पांडवों से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान मां कुंती को जब प्यास लगी तो अर्जुन ने अपने तीर से इस धार पर पानी निकाला था और इससे निर्मित झीलों को कुंतभ्यो, नीला व गंदलासर के रूप में जाना जाता है। इन झीलों से कुछ ही दूरी पर मां नयना देवी का भव्य मंदिर है। वर्ष भर श्रद्धालुओं व प्रकृति प्रेमियों का यहां तांता लगा रहता है।

                                      खजियार झील 
नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण अपने आंचल में प्रकृति के कई रंग समेटे एक मनोरम स्थल है खजियार मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विख्यात चम्बा जिले का यह स्थल जिला मुख्यालय से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल से लगभग 1920 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। क्रमबद्ध खड़े लहलहाते देवदार के पेड़ों के बीच एक मखमली घास के सुंदर मैदान व इसकी गोद में सिमटी है छोटी सी झील। कहते हैं कि खाजीनाग के नाम पर ही खजियार का नामकरण हुआ है। खाजीनाग का अति प्राचीन मंदिर पहाड़ी शैली में काष्ठ शिल्प की उत्कृष्ट कृतियों में से एक है और अत्यंत दर्शनीय स्थल है। मंदिर में प्रतिष्ठित काष्ठ की प्रतिमाएं मनमोहक हैं। मंदिर में खाजी नाग की मानवाकार पाषाण की प्रतिमा स्थापित है। खजियार के दिलकश नजारे व नैसर्गिक सौंदर्य पर्यटकों को लुभाते ही नहीं बल्कि खजियार की मनोहारी छटा उनके मन को मोह लेती है। सर्दी में गिरते बर्फ के फाहों के बीच इस स्थल को निहारना स्विट्जरलैंड का आभास देता है और यहां की यात्रा विदेश यात्रा की अनुभूति प्रदान करती है।

                                   कमरूनाग झील 
करसोग मार्ग पर मंडी से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रोहांडा व चौकी नामक स्थानों से यात्रा कर इस स्थान पर पहुंचा जा सकता है। यह स्थल पहाड़ियों के आंचल में लगभग नौ हजार फुट की ऊंचाई पर है। घने देवदार, कैल, बान के जंगलों के सुंदर नजारों के मध्य पैदल मार्ग से इस रमणीक स्थल तक पहुंचा जा सकता है। कमरूनाग झील के चारों ओर फैली हरियाली सुंदर नगरी यात्रा की थकान मिटा देती है। झील के किनारे पर पहाड़ी शैली का देव कमरूनाग का प्राचीन मंदिर है। देव कमरूनाग को वर्षा का देवता माना जाता है। कहते हैं कि महाभारत के युद्ध में कमरूनाग ने रत्नचंद के नाम से भाग लिया, जिसे श्री कृष्ण ने युद्ध समाप्ति पर कमरूनाग की इच्छा के अनुरूप इस स्थल पर स्थापित किया था। जन समुदाय में देव कमरूनाग को बड़े देव (स्थानीय भाषा में बड़ादेयो) के नाम से पूजते हैं व वर्षा का देवता के नाम से पूजनीय अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित हैं। इस झील की गहराई जिज्ञासुओं के लिए एक अबूझ पहेली है। इसमें श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार सोने, चांदी के सिक्के व आभूषण डालते हैं।

                                      पराशर झील 
मंडी नगर से 40 किलोमीटर दूर तथा समुद्र तल से 9 हजार फुट की ऊंचाई व 2730 की ऊंचाई पर सिराज, सनोर, बदार व उतरशाला पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में स्थित है मनोहारी पराशर झील। यहां की शांत प्राकृतिक छटा और संगीतमय वातावरण के मूक निमंत्रण  से वशीभूत होकर ही शायद ऋषि पराशर ने इसे अपनी तपो स्थली बनाया था। उन्हीं के नाम से इस स्थल का नाम पराशर पड़ा। पराशर झील के पास पहुंचने पर इसकी सुंदरता देखकर रास्ते की सारी थकान गायब हो जाती है। लगभग आधा किलोमीटर के दायरे में फैली इस झील की चारों तरफ छोटी-छोटी पहाड़ियां और उसके आंचल में स्वच्छ व निश्चल कटोरीनुमा झील कुदरता का एक अनोखा नजारा पेश करती है। प्राकृतिक सौंदर्य के अतिरिक्त झील के मध्य में तैरता हरा-भरा भूखंड इसकी सुंदरता को और भी निखारता है। यह एक आश्चर्य है जिसे स्थानीय भाषा में बैड़ा कहते हैं। झील के तट पर बिखरा आलौकिक सौंदर्य और चिर स्तब्धता अपनी पुरातन दिनों की गाथा एक अनोखे स्वर्णिम आनंद से हृदय को विभोर कर देती है। हर वर्ष (जून मास में) यहां आषाढ़ मास की संक्रांति को सरनाहुली का मेला लगता है जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु स्थानीय देवी-देवताओं को रथों पर सुसज्जित कर लोक वाद्य यंत्रों की मधुर लहरियों के साथ इस मेले में लाते हैं। देवी-देवताओं व मानव का यह समागम यहां के मौन सौंदर्य में और बढ़ौतरी करता है।

                                   सरोलसर झील 
जिला कुल्लू के उपमंडल आनी के तहत जिले में सबसे अधिक ऊंचाई (लगभग 10800 फुट) पर स्थित है जलोडी दर्रा। इस दर्रे से लगभग 5-6 किलोमीटर पगडंडी से चल कर सरोलसर तक पहुंचा जा सकता है। सरोलसर पर्यटकों के लिए बेहतर सैरगाह तथा श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ स्थल के रूप में दूर-दूर तक विख्यात है। इस पवित्र तीर्थ व प्राकृतिक सौंदर्य की संगम स्थली में स्थित है मां बूढ़ी नागन का एक प्राचीन मंदिर। इस मंदिर के प्रांगण में एक प्राकृतिक एवं पुरातन झील है। इस झील के उद्भव को पांडवों के अज्ञातवास से जोड़ा जाता है। झील की विशेष बात यह है कि इसके पानी का कोई स्रोत नहीं है और झील का पानी न कम होता है, न ज्यादा। इससे भी रोचक तथ्य यह है कि यह झील चारों तरफ से पेड़ों से घिरी होने पर भी इस झील में तिनका या पेड़ के पते तक नहीं मिलते। कहते हैं कि जब कभी कोई तिनका या पेड़ आदि का पता झील में गिर जाता है तो एक अदृश्य पक्षी इन तिनकों को निकाल कर झील के किनारे ले जाता है। यह पक्षी किसी-किसी को ही दिखाई देता है। झील के किनारे की पहाडिय़ां, पेड़ और नीले आकाश का प्रतिबिम्ब इसमें साफ झलकता है। इससे इसकी स्वच्छता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

                                        रेणुका झील 
रेणुका झील सिरमौर जिले में स्थित है। यह सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन से लगभग 37 किलोमीटर दूर व समुद्र तल से लगभग 672 मीटर व चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों के बीच में लगभग 3214 मीटर के घेरे में फैली नारी आकृति में प्रतीत होती है। हर प्रतिवर्ष दीवाली के पश्चात दशमी के दिन यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है। रेणुका का यह मेला मां-पुत्र के मिलन का प्रतीक है। झील के पास भगवान परशुराम का प्राचीन मंदिर व भगवती रेणुका का मठ है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसको अंग्रेजों के समय में गोरखों की एक टुकड़ी ने बनवाया था।

                                     मणिमहेश झील 
मणिमहेश झील चम्बा जिले के भरमौर क्षेत्र के कैलाश पर्वत के आंचल में भरमौर से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसे दूसरा कैलाश भी कहा जा सकता है। ज्यों-ज्यों हम ऊपर की तरफ चढ़ते जाते हैं मणिमहेश यात्रा रोमांच का नया अनुभव देती रहती है जहां कदम-कदम पर अलग-अलग नजारे देखने को मिलते हैं और ऐसा लगता है मानो आसमान हमसे ज्यादा दूर नहीं है। यह झील समुद्रतल से लगभग 13270 फुट की ऊंचाई पर लगभग डेढ़ किलोमीटर की परिधि में फैली है। मणिमहेश की यात्रा प्रति वर्ष अगस्त-सितम्बर मास में आयोजित होती है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से भाग लेते हैं। यह पवित्र यात्रा कृष्ण जन्म अष्टमी से शुरू होकर राधा अष्टमी तक चलती है। 

                                         नाको झील 

जिला किन्नौर के पूह सब मंडल के अंतर्गत शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में समुद्रतल से 3662 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नाको झील जो पंदम संभव को समर्पित है। इसे विश्व की सबसे ऊंची तीर्थस्थली भी कहा जाता है, पूह की वादियों से होते हुए खाव व नाको तक का रोमांचकारी मार्ग से इस स्थल तक पहुंच कर पर्यटक व प्रकृति प्रेमी झील के पानी को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।  

#हिमाचलदिवस जानिए राज्य से जुड़ी 10 रोचक बातें

हिमाचल प्रदेश का आज स्थापना दिवस है। आजादी के बाद 15 अप्रैल, 1948 को 28 पहाड़ी रियासतों को मिलाकर नया राज्य बनाया गया था। बताया जाता है कि यहां प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों की सादगी के अलावा कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिनकी वजह से हिमाचल पूरे देश में सबसे आगे है। इनमें से बहुत सी बातें राजनीति की वजह से संभव हो पाई है और उसका श्रेय भी राज्य की जनता को जाता है। कुछ कमियां भी हैं और उनका आरोप भी काफी हद तक राजनीति को दिया जा सकता है।

जानिए राज्य से जुड़ी 10 रोचक बातें

1. ‘हिमाचल प्रदेश’ नाम संस्कृत के विद्वान आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा ने दिया था। हिमाचल दो शब्दों से मिलकर बना है- हिम+अचल। हिम यानी बर्फ और अचल यानी पहाड़।

2. हिमाचल प्रदेश भारत का 18वां राज्य बना था। इसमें 28 पहाड़ी रियासतें मिलाई गई थीं।

3. हिमाचल प्रदेश 'देवभूमि' कहलाता है, क्योंकि यहां गांव-गांव में देवता व मंदिर हैं। साथ ही हर जगह लोकप्रिय मेले और त्योहार आदि मनाए जाते हैं।

4. राज्य की इकॉनमी तीन चीज़ों पर निर्भर करती है- 1 बिजली 2. पर्यटन 3. खेती/बागवानी।

5. पॉलिथीन और तंबाकू पर बैन लगाने के बाद उसे सही तरीके से लागू करने में हिमाचल प्रदेश सबसे आगे है।

6. धर्मशाला स्थित HPCA क्रिकेट स्टेडियम दुनिया के सबसे सुंदर क्रिकेट स्टेडियम में से एक है।

7. UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल शिमला-कालका रेलमार्ग और पठानकोट-जोगिंदरनगर मार्ग काफी प्रसिद्ध है।

8. हिमाचल 8,418 MW बिजली पैदा करता है। देश का मेगावॉट क्षमता का पहला हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन आजादी से पहले हिमाचल के जोगिंदरनगर में शुरू हुआ था।

9. कांगड़ा का बिलिंग (बीड़) पूरी दुनिया में पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर है। यहां से उड़ान भरने के लिए देश-विदेश से सैकड़ों पायलट आते हैं।

10. हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक भोज को 'धाम' कहा जाता है। विशेष ढंग से बनाए गए व्यंजनों को पत्तों की थाली में परोसकर जमीन पर बैठकर खाते हैं।

यहां गिनाने के लिए इतना कुछ है कि लिखते-लिखते थक जाएंगे मगर सिलसिला खत्म नहीं होगा।