Friday, April 7, 2017

अभ्यास मंत्र

सिर्फ योजना बनाने से ही बात नहीं बनती, बल्कि किसी भी उद्देश्य को लेकर की गई "प्लानिंग" तभी सफलता की ओर ले जाती है, जब उससे संबंधित कार्यों का "अभ्यास" किया जाए ।
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असल में उचित "योजना" और निरंतर "अभ्यास" के बल पर ही मंजिल तक पहुंचा जा सकता है । आपके पास क्षमता हो सकती है, आप प्रतिभावान हो सकते हैं, आपमें दृढ़ इच्छाशक्ति हो सकती है और आपमें आत्मविश्वास भी हो सकता है .. इसके बावजूद यदि अपने काम का "अभ्यास" आप नहीं करेंगे, तो आपका प्रदर्शन उस हद तक नहीं हो सकता, जैसी आपकी अपेक्षा थी । यदि आप परफेक्ट होना चाहते हैं तो "अभ्यास" जरूरी है ।
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यदि जीवन पर नजर डालें तो बचपन से ही सीखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और यह सीखना सतत अभ्यास के माध्यम से ही होता है चाहे चलना हो या बोलना, अभ्यास से बच्चा सब कुछ सीखता है .. वह बार-बार गिरता है, फिर उठकर चल देता है
धीरे-धीरे वह चलना सीख जाता है बार-बार वह गलत बोलता है, पर बोलते-बोलते सही बोलना सीख जाता है .. सिर्फ बचपन में ही नहीं, बल्कि ताउम्र "अभ्यास" की यही प्रक्रिया व्यक्ति को संपूर्ण ज्ञानार्जन में मदद करती है
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कोई भी फील्ड हो , परफेक्शन के लिए "अभ्यास" की जरूरत होती है। यदि व्यक्ति में कोई गुण जन्मजात हो तो भी अभ्यास के बगैर उसमें निखार नहीं लाया जा सकता.
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अभ्यास एक ऐसा मंत्र है, जो हमारे शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तर पर विकास के लिए जरूरी है .. चाहे मानसिक स्तर पर हमें अपनी रचनात्मकता बढ़ानी हो अथवा शारीरिक फिटनेस प्राप्त करनी हो, रोजाना "अभ्यास" के बल पर ही हम अपने "लक्ष्य" को प्राप्त कर सकते हैं. अभ्यास से ही किसी काम में विशेषज्ञता हासिल होती है और फिर जीवन में निर्धारित मंजिल की ओर कदम तेजी से बढ़ने लगते हैं.
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