• हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जो विश्व भर में सबसे बड़े धर्मों में से तीसरे स्थान पर आता है लेकिन इसी धर्म की 95 प्रतिशत जनसंख्या एक देश, एक राष्ट्र ‘भारत’ को बनाती है।
• हिन्दू धर्म बहुदेववादी तरीके का पालन करता है, तो किसी का मानना है कि यह धर्म एकेश्वरवादी सिद्धांत से बना है। लेकिन तथ्यों की मानें तो हिन्दू धर्म इन सभी सिद्धातों से पूरित है।
• यह एक ऐसा धर्म है जो किसी को एक सिद्धांत में नहीं बांधता। हिन्दू धर्म का मानना है कि ईश्वर तक पहुंचने के साधन काफी सारे हैं लेकिन परिणाम एक ही है। इसलिए दुनिया को ‘भगवान’ का नाम देने वाले इस धर्म में अनेक देवी-देवताओं को पूजा जाता है।
• हिन्दू धर्म के चार वेद – ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद तथा यजुर्वेद, सभी वेद अपने आप में आज भी मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। हिन्दू धर्म के अनुयायी इन सभी वेदों एवं पौराणिक ग्रंथों को अपना गुरु रूप मानकर अपनी कठिनाइयों का समाधान पाते हैं।
• हिन्दू धर्म के दो महान ग्रंथ- रामायण एवं महाभारत, स्वयं मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं।
• आजकल लोग स्त्री को अपने बराबर समझें या ना समझें, लेकिन हिन्दू धर्म ने हमेशा से ही स्त्री रूपी ‘शक्ति’ को देवों के समान महान माना है। हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति हैं ब्र्ह्मा, विष्णु एवं महेश (शिव)। भगवान ब्रह्मा जहां सृष्टि की संरचना के लिए पुराणों में उल्लिखित हैं वहीं विष्णुजी को इस संसार का पालनहार माना गया है।
• भगवान शिव भक्तों की इच्छाओं को पूरित करने एवं अपने रौद्र रूप से बुरे प्रभाव को नष्ट करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म ने एक देवी को हमेशा ही शक्ति का प्रतीक माना है।
• वह देवी चाहे कोई भी हो, मां लक्ष्मी, माता पार्वती, मां दुर्गा या इनका कोई स्वरूप। प्रत्येक देवी को एक शक्ति के रूप में प्रकट किया गया है जो पापियों का संहार करने के लिए हमेशा ही मौजूद हैं।
• यदि हिन्दू धर्म को अन्य विश्व प्रसिद्ध धर्मों से तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह दुनिया के सबसे पुराने धर्म में गिना जाता है। लेकिन यदि आप हिन्दू धर्म के किसी अनुयायी से ऐसा ही कोई प्रश्न करें कि हिन्दू धर्म कितना पुराना है तो वह इसकी गणना लाखों या करोड़ों वर्ष पुरानी भी दे सकता है।
• हिन्दू धर्म में समय का चक्र अन्य धर्मों के समय चक्र से काफी भिन्न है। भगवान ब्रह्मा ने समय को ‘कल्प’ के रूप में प्रदर्शित किया था और इस प्रत्येक कल्प में 14 ‘मनवंतरों’ को शामिल किया गया है।
• इस गणना के अनुसार हम युगों के जाल को पार करते हुए आज केवल सातवें मनवंतर (वैवस्वत) तक ही पहुंच पाए हैं। लेकिन आम मनुष्य केवल युगों को चार विभाजन में पाता है – सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग एवं कलियुग।
• यह एक ऐसा धर्म है जो किसी को एक सिद्धांत में नहीं बांधता। हिन्दू धर्म का मानना है कि ईश्वर तक पहुंचने के साधन काफी सारे हैं लेकिन परिणाम एक ही है। इसलिए दुनिया को ‘भगवान’ का नाम देने वाले इस धर्म में अनेक देवी-देवताओं को पूजा जाता है।
• हिन्दू धर्म के चार वेद – ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद तथा यजुर्वेद, सभी वेद अपने आप में आज भी मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। हिन्दू धर्म के अनुयायी इन सभी वेदों एवं पौराणिक ग्रंथों को अपना गुरु रूप मानकर अपनी कठिनाइयों का समाधान पाते हैं।
• हिन्दू धर्म के दो महान ग्रंथ- रामायण एवं महाभारत, स्वयं मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं।
• आजकल लोग स्त्री को अपने बराबर समझें या ना समझें, लेकिन हिन्दू धर्म ने हमेशा से ही स्त्री रूपी ‘शक्ति’ को देवों के समान महान माना है। हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति हैं ब्र्ह्मा, विष्णु एवं महेश (शिव)। भगवान ब्रह्मा जहां सृष्टि की संरचना के लिए पुराणों में उल्लिखित हैं वहीं विष्णुजी को इस संसार का पालनहार माना गया है।
• भगवान शिव भक्तों की इच्छाओं को पूरित करने एवं अपने रौद्र रूप से बुरे प्रभाव को नष्ट करने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म ने एक देवी को हमेशा ही शक्ति का प्रतीक माना है।
• वह देवी चाहे कोई भी हो, मां लक्ष्मी, माता पार्वती, मां दुर्गा या इनका कोई स्वरूप। प्रत्येक देवी को एक शक्ति के रूप में प्रकट किया गया है जो पापियों का संहार करने के लिए हमेशा ही मौजूद हैं।
• यदि हिन्दू धर्म को अन्य विश्व प्रसिद्ध धर्मों से तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह दुनिया के सबसे पुराने धर्म में गिना जाता है। लेकिन यदि आप हिन्दू धर्म के किसी अनुयायी से ऐसा ही कोई प्रश्न करें कि हिन्दू धर्म कितना पुराना है तो वह इसकी गणना लाखों या करोड़ों वर्ष पुरानी भी दे सकता है।
• हिन्दू धर्म में समय का चक्र अन्य धर्मों के समय चक्र से काफी भिन्न है। भगवान ब्रह्मा ने समय को ‘कल्प’ के रूप में प्रदर्शित किया था और इस प्रत्येक कल्प में 14 ‘मनवंतरों’ को शामिल किया गया है।
• इस गणना के अनुसार हम युगों के जाल को पार करते हुए आज केवल सातवें मनवंतर (वैवस्वत) तक ही पहुंच पाए हैं। लेकिन आम मनुष्य केवल युगों को चार विभाजन में पाता है – सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग एवं कलियुग।
• विश्वविख्यात ऐसे कई शब्द हैं जो संस्कृत भाषा से बने हैं। ऐसी कई भाषाएं हैं जिनके विकसित होने के पीछ मूल रूप से संस्कृत भाषा का ही प्रयोग किया गया है। इस बात को दुनिया भर के महान शोधकर्ताओं ने भी सही माना है।

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